स्वास्थ्य की दृष्ठि से भी फायदेमंद साबित हो रहा है फास्टैग

भारत सहित पूरा विश्व एक भयानक महामारी, कोविड-19 के संकट से जूझ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लगातार लोगों को इससे बचाने के लिए उचित सुझाव दिए जा रहे हैं। इन सुझावों में सबसे प्रभावी है सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना।

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इस क्रम में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचआई) की फास्टैग योजना एक वॉरियर के रुप में काम कर रही है, क्योंकि नकद लेनदेन न होने के कारण ड्राइवरों और टोल बूथ स्टाफ दोनों बिना कोई मानवीय संपर्क के अपना काम कर पा रहे हैं।

मई के शुरुआत तक पूरे देश में लगभग 1.68 करोड़ फास्टैग जारी किए जा चुके हैं। फास्टैग वर्तमान समय में जब लोगों को एक दूसरे से दूरी बनाकर रहने की सलाह दी जा रही है बेहतरीन विकल्प बन कर उभरा है।

वर्तमान में जब पूरा देश लॉकडाउन का पालन कर रहा है, ऐसे में जरुरी हो जाता है कि बिना किसी बाधा के जरुरी सामान एक राज्य से दूसरे राज्य पहुंचे। क्योंकि देश में ज्यादातर सड़क मार्ग से हीं जरुरी सामानों की आपूर्ति की जाती है। इसलिए फास्टैग का महत्व यहां और भी बढ़ जाता है, इऩ दिनों ये काफी सुरक्षित भी है।

फास्टैग रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन पर काम करने वाली एक तकनीक है, जिसमें बिना किसी फिजिकल कांटेक्ट के पैसा एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है, और इस तरह लोग बिना किसी के संपर्क में आए अपना टोल टैक्स देकर बाधारहित सफऱ का आनंद ले सकते हैं।

क्योंकि आने वाले दिनों में जब लॉकडाउन खत्म हो जाएगा तो वाणिज्यिक वाहनो सहित निजी वाहनों की गतिविधी में भी वृद्धि होगी और इस महामारी के फैलने की आशंका बढ़ जाएगी। लेकिन फास्टैग के उपयोग से इस आशंका को कम किया जा सकता है।

इस संदर्भ में एनएचआई ने भी लोगों से अनुरोध किया है कि टोल नाकों पर ज्यादा से ज्यादा फास्टैग को हीं प्राथमिकता दी जाए। वर्तमान हालात में यह किसी वरदान से कम नहीं है जो सभी को अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा से समझौता किए बिना जीवन और अर्थव्यवस्था को वापस लाने में मदद करेगा।

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